गुरुवार, 17 दिसंबर 2009

खिताब न ले बैठूं!

दीदार-ए-रुखसार से इस क़दर घायल हूँ,
मरहम के बदले शराब न ले बैठूं,
हलावत(१) के चर्चे यूं मशहूर हैं,
पढने के लिए किताब न ले बैठूं,
तेरी आराइश(२) ने कितनो को कब्रगाह भेजा,
बाकियों को बचाने नकाब न ले बैठूं,
हर उस जगह जहां तेरे सईद(३) क़दम पड़ें,
राहगीरों से मैं हिसाब न ले बैठूं,
तेरी महक की तरगीब(४) में खो के कहीं,
उम्मीद-ए-ताज में कांटो का गुलाब न ले बैठूं,
बस अब और देर न कर मुझे अपना बना ले,
मुफलिसी में कहीं मजनू का खिताब न ले बैठूं!
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(१) स्वीटनेस (२) चमकता रूप (३) मुबारक (४) आकर्षण
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12 टिप्‍पणियां:

  1. बस अब और देर न कर मुझे अपना बना ले,
    मुफलिसी में कहीं मजनू का खिताब न ले बैठूं!

    वाह..वाह...मुल्हिद जी!
    आपने तो गजल में जमीनी हकीकत बयान कर दी।
    मुबारकवाद!

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  2. हर उस जगह जहां तेरे सईद(३) क़दम पड़ें,
    राहगीरों से मैं हिसाब न ले बैठूं

    बस अब और देर न कर मुझे अपना बना ले,
    मुफलिसी में कहीं मजनू का खिताब न ले बैठूं!
    वाह वाह क्या बात है श्गब्द नहीं हैं तारीफ के लिये। बधाई और शुभकामनायें

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  3. "हर उस जगह जहां तेरे सईद क़दम पड़ें,
    राहगीरों से मैं हिसाब न ले बैठूं..."
    Indeed it was a journey down the memory lane. We often associate our memories to particular places and no matter how hard we try, we cannot detach ourselves completely.
    A nice composition as always...enjoyed every word.

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  4. Bhaavpoorn sundar rachna...

    Ek sujhaav hai,
    maine ise padhte waqt jab baithun se pahle "na" ko lagakar padha to mujhe bada achchha laga...ekbaar dekhiyega...

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  5. मुफलिसी में कहीं मजनू का खिताब न ले बैठूं! wow wonderful.....aapki urdu bahut acchi hai

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  6. har baar aapki rachna pichhli wali se jyada achhi hoti hai... very fine words and very gd thought..

    -Sheena

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  7. an addition from my side once again:
    ज़िंदगी यूं तो चलती रहेगी
    इक नई दासतां लिखती रहेगी,
    बस यही डर है जीने के लिए मैं
    तेरी यादों से सांसें उधार न ले बैठूं ।

    Keep writing and presenting such wonderful poems in future...good luck

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  8. हर उस जगह जहां तेरे सईद(३) क़दम पड़ें,
    राहगीरों से मैं हिसाब न ले बैठूं,awesome

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  9. हलावत(१) के चर्चे यूं मशहूर हैं,
    पढने के लिए किताब न ले बैठूं,

    Awesome... kahan sey latey ho yeh hasin sey khwab :)

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