सोमवार, 25 अप्रैल 2011

अनमोल कर दिया!

प्रिय मित्रो,
सादर नमस्कार!
आज लगभग डेढ़ महीने बाद कुछ लिखने का मौका मिला, असल में इतना व्यस्त था की अपने आप को भी वक़्त नहीं दे पा रहा था!
पेश-ए-खिदमत है आप सब के आशीर्वाद को व्याकुल मेरी एक नयी रचना, आशा करता हूँ आपको पसंद आएगी!

मुझे याद है वो दिन जब पत्थर था मैं
और कोई राहगीर मुझे खरीदता नहीं था
जी रहा था मुफलिसी की ज़िन्दगी पल पल घटती
किसी रहबर का दिल भी कभी पसीजता नहीं था
हर रोज़ शाम दरख्तों की आड़ में छुप कर
हस्सास(१) निगाहों से तुझे निहारा करता था
तेरी इक नज़र की कशिश की महक को ही
अपने दिल की गहराइयों में उतारा करता था
फज़ल से वो पल भी आया उस दिन ज़िन्दगी में
तुने छुआ मुझे हलके से और फिर बात की
ऐसा लगा किसी हूर ने छड़ी घुमाई और
अमावस सी ज़िन्दगी में पूनम की रात की
तेरे होटों की छुअन ने तो जैसे
कडवे ज़हर भी शीरे का घोल कर दिया
मैं मिटटी का ज़र्रा था बेकार तूने
खरीद कर मुझे लिल्ला अनमोल कर दिया
बस आखिरी सफ़र भी अब आशिकाना हो जाए
तेरी मेरी कहानी इश्क का अफसाना हो जाए
सांस टूटे तो टूटे तेरी बाहों की आगोश में
खुदाया मौत भी मेरी फिर शायराना हो जाए

(१) भावुक

शुक्रिया!

26 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे याद है वो दिन जब पत्थर था मैं
    और कोई राहगीर मुझे खरीदता नहीं था
    जी रहा था मुफलिसी की ज़िन्दगी पल पल घटती
    किसी रहबर का दिल भी कभी पसीजता नहीं था


    waah bahut sunder ahsas , seedha dil me uter gaye, aisi sufiyana rachna maine to aajtak nahi padhi , badhai ...........

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  2. idhar kai dino se roz sochtaa tha ki aapse poochoon ki agli rachnaa kab aa rahi hai... time hi nahin mil pa rahaa tha...aapki kalam se arsaa ho gayaa tha kuchh padhe... aaj aapne khwahish poori kar di...
    deri ki par agar achchhaa padhne ko mile to wo intezaar bhi achchha lagtaa hai

    bahut achchi lagi.. :-)

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  3. बस आखिरी सफ़र भी अब आशिकाना हो जाए
    तेरी मेरी कहानी इश्क का अफसाना हो जाए
    सांस टूटे तो टूटे तेरी बाहों की आगोश में
    खुदाया मौत भी मेरी फिर शायराना हो जाए!

    वाह ! गुरु जी कमाल का दिया !

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  4. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!
    अपना लेखन नियमित रक्कें!

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  5. बहुत अच्छा लगा की आप इतने दिनों बाद दोबारा ब्लॉग पे पधारे आपकी कमी महसूस की जा रही थी जो अपने अज्ज पूरी कर दी जीवन में सब कम अपनी अपनी जगह पे जरुरी होता है पर दिगम्बर जी अप्ने लिए समय जरुर निकले वरना आपका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है

    आपकी राचन बहुत ही सुद्नर है बस इसीतरह लगे रहे वही आशा है हमें आप से
    कभी हम रे लिए समय जरुर निकले के मेरे ब्लॉग पे पधारे

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  6. वाह भाई वाह...इतने अरसे बाद रचना कही है लेकिन कमाल कर दिया है...इसे कहते हैं सौ सुनार की एक लुहार की...इस खूबसूरत रचना के लिए मेरी बधाई स्वीकारें..
    नीरज

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  7. खरीद कर मुझे लिल्ला अनमोल कर दिया
    बस आखिरी सफ़र भी अब आशिकाना हो जाए
    तेरी मेरी कहानी इश्क का अफसाना हो जाए
    सांस टूटे तो टूटे तेरी बाहों की आगोश में
    खुदाया मौत भी मेरी फिर शायराना हो जाए"

    Bahut sunder shbd !usse bhi sunder kahne ki ada !waah !! लिल्ला अनमोल कर दिया...

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  8. button saabaashe..tarakki isko kahte hain...
    n tarse/tarshe the to the pattharr....
    Tarse/tarshe hai to khuda thahre....
    Bhai wah...ise kahte hain chha jaana..nahi likha to nahi likha..aur ...likkh to itna badiya kalaam....Tussi chha gaye veer ji...twaanu tanyavaad inni vadiya kavita laye...

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  9. तेरी इक नज़र की कशिश की महक को ही
    अपने दिल की गहराइयों में उतारा करता था

    वाह ... क्या बात है !

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  10. ਭਾਜੀ! ਛਾ ਗਏ!
    ਹਾਫ਼ ਪੰਜਾਬੀ, ਬੇਸਿਕਲੀ ਭੈਯਾ (ਹਾ ਹਾ ਹਾ)
    ਆਸ਼ੀਸ਼

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  11. वाह सुरेन्द्र ....आपकी स्टाइल से थोडा अलग लिखा आपने इस बार .....लेकिन शानदार ...

    क़तील शिफाई का एक शेर याद आ गया
    "Akhari hichaki tere zanon pe aye
    maut bhi main shayarana chahata हूँ"

    उत्तम ....लिखते रहिये :-)

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  12. namaskar ji
    blog par kafi dino se nahi aa paya mafi chahata hoon

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  13. बस आखिरी सफ़र भी अब आशिकाना हो जाए
    तेरी मेरी कहानी इश्क का अफसाना हो जाए
    सांस टूटे तो टूटे तेरी बाहों की आगोश में
    खुदाया मौत भी मेरी फिर शायराना हो जाए
    वाह वाह ज़िन्दगी भी शायराना और मौत भी शायराना। बहुत अच्छी लगी रचना। बधाई

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  14. "बस आखिरी सफ़र भी अब आशिकाना हो जाए
    तेरी मेरी कहानी इश्क का अफसाना हो जाए
    सांस टूटे तो टूटे तेरी बाहों की आगोश में
    खुदाया मौत भी मेरी फिर शायराना हो जाए"

    bhai awesome... I'm speechless... so true... :)

    Bohot bohot undaa... der sey aaye... magar saath mein toofan sa laye... :))

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  15. बस आखिरी सफ़र भी अब आशिकाना हो जाए
    तेरी मेरी कहानी इश्क का अफसाना हो जाए
    सांस टूटे तो टूटे तेरी बाहों की आगोश में
    खुदाया मौत भी मेरी फिर शायराना हो जाए"
    " behd shayarana or rumani andaaj wah"
    regards

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  16. सांस टूटे तो टूटे तेरी बाहों की आगोश में
    खुदाया मौत भी मेरी फिर शायराना हो जाए

    ...बहुत खूब! बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति..

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  17. बस आखिरी सफ़र भी अब आशिकाना हो जाए
    तेरी मेरी कहानी इश्क का अफसाना हो जाए
    सांस टूटे तो टूटे तेरी बाहों की आगोश में
    खुदाया मौत भी मेरी फिर शायराना हो जाए
    Wah!Wah!Wah! Harek pankti ek se badhake ek!

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  18. अमावस सी ज़िन्दगी में पूनम की रात की behad bhavuk...

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  19. Aap toh pehle se hi anmol they,par itni sunder aur behtareen composition post karke aapne is blog ko bhi anmol kar diya.Main apne aap ko khushkismat samajhti hun jo itne khoobsurat shabdon ko padhne ka mujhe saubhagya mila. Itni kam umar mein itni gehri aur paripakv soch...Simply COMMENDABLE....!!!!

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  20. बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने लाजवाब रचना लिखा है जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

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  21. Aap behad khubsurat likhte hai.........first time i read your all post ....nice blog.....

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  22. aakhiri ki in panktiyon ne jo keh diya uska to koi jawab hi nahi.....
    बस आखिरी सफ़र भी अब आशिकाना हो जाए
    तेरी मेरी कहानी इश्क का अफसाना हो जाए
    सांस टूटे तो टूटे तेरी बाहों की आगोश में
    खुदाया मौत भी मेरी फिर शायराना हो जाए

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  23. मुझे याद है वो दिन जब पत्थर था मैं
    और कोई राहगीर मुझे खरीदता नहीं था
    जी रहा था मुफलिसी की ज़िन्दगी पल पल घटती
    वाह सुरेन्द्र जी... शानदार
    ...बहुत खूब! बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति

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