बुधवार, 2 सितंबर 2009

एहसासों को न मरने दिया!

कुछ देर पहले जब मैं ख्यालों की दुनिया में गुम् था,
कुछ कांच के टुकडों को पैरों में चुभता महसूस किया,
नज़र उठा के ज्यूँ ही फर्श के सीने पे निगाह गड़ाई
तेरी यादों को झट समेट हथेली में अपनी महफूज किया,
खून के कतरे जब उसी हथेली से ज़मीं रंगरेज़ करने लगे,
तेरी जुदाई के ग़म से बस बेचैन दिल को भरने दिया,
नींद टूटी तो अपने पे मिटटी के गुबार को गिरता पाया,
बदन का साथ छोड़ दिया पर एहसासों को न मरने दिया,
हर मुमकिन कोशिश की खुदा ने वो बिखरे टुकड़े छिनने की,
कहा क्या बिसात इनकी जब उसने ही ख़ुद से दूर किया,
कर दे इन्हे मेरे हवाले और जन्नत-ऐ-नसीब कुबूल कर,
देखा इलाही को मुस्कुरा और टुकडों संग दोज़ख मंज़ूर किया!

21 टिप्‍पणियां:

  1. नींद टूटी तो अपने पे मिटटी के गुबार को गिरता पाया,
    बदन का साथ छोड़ दिया पर एहसासों को न मरने दिया!

    वाह...!
    क्या खूबसूरत ख्वाब था।
    मेरी दुआ है कि ये आपकी जिन्दगी के हिस्से बनें।
    बधाई

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  2. कुछ देर पहले जब मैं ख्यालों की दुनिया में गुम् था,
    कुछ कांच के टुकडों को पैरों में चुभता महसूस किया,

    वाह...!
    इस हसीन ख्वाब के लिए,
    बधाई!

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  3. कुछ देर पहले जब मैं ख्यालों की दुनिया में गुम् था,

    I can just see this line only... unable to see rest of d poem... why? :(

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  4. बहुत ही खुशी की बात है जो एहसासों को मरने नहीं दिया।
    नींद टूटी तो अपने पे मिटटी के गुबार को गिरता पाया,
    बदन का साथ छोड़ दिया पर एहसासों को न मरने दिया!
    बहुत सुन्दर भाव हं बधाई

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  5. कुछ देर पहले जब मैं ख्यालों की दुनिया में गुम् था,
    कुछ कांच के टुकडों को पैरों में चुभता महसूस किया,
    नज़र उठा के ज्यूँ ही फर्श के सीने पे निगाह गड़ाई
    तेरी यादों को झट समेट हथेली में अपनी महफूज किया,
    सुन्दर भाव लिये ,बधाई

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  6. बदन का साथ छोड़ दिया पर एहसासों को न मरने दिया,
    देखा इलाही को मुस्कुरा और टुकडों संग दोज़ख मंज़ूर किया!
    bahut acha likha hai sir....
    truly a "bhawnatmak abhivyakti" ...

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  7. Hello,

    You have a great vocabulary!
    The subject and the content of your creation is quite touchy. A very nice attempt...

    कुछ कांच के टुकडों को पैरों में चुभता महसूस किया,
    नज़र उठा के ज्यूँ ही फर्श के सीने पे निगाह गड़ाई
    तेरी यादों को झट समेट हथेली में अपनी महफूज किया,

    These lines are very well written.
    Regards,
    Dimple
    http://poemshub.blogspot.com

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  8. वाह आपकी ये रचना बहुत ही शानदार है और दिल को छू गई! इस बेहतरीन रचना के लिए बधाई!

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  9. तेरी जुदाई के ग़म से बस बेचैन दिल को भरने दिया,
    नींद टूटी तो अपने पे मिटटी के गुबार को गिरता पाया,
    बदन का साथ छोड़ दिया पर एहसासों को न मरने दिया

    bahut hi gehra ehsaas

    -Sheena

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  10. Jo aisee dua kisee aur ke liye karta ho, jannat use bhee zaroor milegee....!
    Sorry, transliteration is not responding!

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  11. कर दे इन्हे मेरे हवाले और जन्नत-ऐ-नसीब कुबूल कर,
    देखा इलाही को मुस्कुरा और टुकडों संग दोज़ख मंज़ूर किया
    बेहद खुब्सूरत भाव .......

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  12. Beautiful poem! Very deep thoughts have been been expressed in the most appropriate words. A touch of Urdu has added to the beauty of the poem.
    I couldn't quote a few lines, because all of them are wonderful.

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  13. इस बेहतरीन रचना के लिए बहुत बहुत बधाई

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  14. देखा इलाही को मुस्कुरा और टुकडों संग दोज़ख मंज़ूर किया!

    वाह वा...ये तो प्यार की इंतिहा है...कमाल की नज़्म है आपकी...

    नीरज

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  15. कुछ देर पहले जब मैं ख्यालों की दुनिया में गुम् था,
    कुछ कांच के टुकडों को पैरों में चुभता महसूस किया,
    नज़र उठा के ज्यूँ ही फर्श के सीने पे निगाह गड़ाई
    तेरी यादों को झट समेट हथेली में अपनी महफूज किया,

    वाह......!!

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