गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

नज़र तू आया!

आज तेरी याद ने कुछ यूं सताया,
लाख रोका दिल को पर भरता आया,
तन्हाई दूर करने घूमने निकला,
लहरों के साहिल पे खुद को चलता पाया,
गहवारा(१) लहरों से चाँद निकलते देखा,
इक पल को तेरा चेहरा नज़र आया,
आँखें मूँद लहरों से गुजारिश जो की,
हर छींट संग मोतियों का पुलिंदा आया,
चुन चुन के उन में सब से पारसा(२) मोती,
अपने हाथों से तेरे लिए इक हार बनाया,
सोचा नीले समंदर में डूब के देखूं,
अगले ही पल तेरी आँखों का ख़याल आया,
दिल ने फिर बादलों में खोने को जो कहा,
तेरी जुल्फों से खेलने का मन बना आया,
तेरे आने की उम्मीद में पलकें जो मूंदी,
इलाही के रूप में मुझको नज़र तू आया!

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(१) हिचकोले खाती (२) पवित्र
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18 टिप्‍पणियां:

  1. Hello ji,

    Jo kamaal aapne kia hai shabdo ki iss hera-pheri se wo aapko samajh nahi aayega :)
    Hum jaise padne walo ko hi samajh aayega!! :)

    चुन चुन के उन में सब से पारसा(२) मोती,
    अपने हाथों से तेरे लिए इक हार बनाया,

    Khoobsurat hai wo harr shabd jo aapne likha hai...
    Umdaah hai wo harr khayaal jinko aapne iss haar mein piroya hai :)

    Fantabulous!

    Regards,
    Dimple
    http://poemshub.blogspot.com

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  2. khoobsurat alfaaz aur dilkash andaaz...
    ishkiya kahyalat se lablez aapki nazm...bahut pasand aayi..
    shukriya...

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  3. Bahut pyari aur sweet si composition hai!!!
    apni kalpnaon ko bahut hi khubsuruti se apne shabdo main bandha hai!!!!
    तन्हाई दूर करने घूमने निकला,
    लहरों के साहिल पे खुद को चलता पाया,

    सोचा नीले समंदर में डूब के देखूं,
    अगले ही पल तेरी आँखों का ख़याल आया,

    दिल ने फिर बादलों में खोने को जो कहा,
    तेरी जुल्फों से खेलने का मन बना आया,

    तेरे आने की उम्मीद में पलकें जो मूंदी,
    इलाही के रूप में मुझको नज़र तू आया!

    baut bariya hai,
    aise hi likhte raheye....

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  4. Waah...Waah...Waah... jitne mohak bhaav utni hi sundar abhivyakti...

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  5. तेरे आने की उम्मीद में पलकें जो मूंदी,
    इलाही के रूप में मुझको नज़र तू आया!

    ek ek line dil se likhi gayi hai

    -Shruti

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  6. surendra ji
    तन्हाई दूर करने घूमने निकला,
    लहरों के साहिल पे खुद को चलता पाया
    kamal hai ji kamal
    abhar.........

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  7. "तेरे आने की उम्मीद में पलकें जो मूंदी,
    इलाही के रूप में मुझको नज़र तू आया!"
    बहुत खूब !!!


    कभी अजनबी सी, कभी जानी पहचानी सी, जिंदगी रोज मिलती है क़तरा-क़तरा…
    http://qatraqatra.yatishjain.com/

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  8. सुझाव पर गौर किया गया है। दोस्त अच्छा लगा। बेहद अच्छा लगा। कविता तो सुपर्ब होती है ।

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  9. तेरे आने की उम्मीद में पलकें जो मूंदी,
    इलाही के रूप में मुझको नज़र तू आया!

    बहुत खूबसूरत ...

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  10. बहुत सुन्दर रचना है ! बधाई ! महबूब को खुदा का दर्जा दे दिए ... यही तो प्यार है !

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  11. bhaav achhe hain ....zara nayapan laane ki koshish aur craft pe dhyaan diya ja sakta hai ..charcha manch ke zariye aap ke pate par pahuncha hun

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  12. dastaan to khoobsoorat hai...Aankh moond jab lahron se guzarish ko to motiyon ka pulanda paaya....aapse bhi guzarish hai...guzarish ka tareeka sikhaiye...hamko bhi to moti chahiye:-)

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  13. bahut achche bhaav likhe hain.......
    khas kar ..... parsa moti apne haathon se haar banaya

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