शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2010

सपने....

सपने....
होश संभाले तो मां बाप ने सजाये,
बचपन से ही घोट घोट के पिलाये,
स्कूल में सब से अव्वल ही रहना,
ध्यान से पढना किसी से न कहना,
कितनी उम्मीदे है तुम से लगायी,
घनटो जाग के राते बितायी,
उन सब का दिल से तुम रखना खयाल,
करने तुम ही को हैं पूरे ओ लाल,
सपने....
अब अच्छी जिंदगी बिताने के लिये,
मोटी पगार की नौकरी पाने के लिये,
जैसे अमावास में चमकती सी रात हो,
ल्ग्जरी कार मिल जाये तो क्या बात हो,
इसी जदो-जहेद में हुये अपनो से दूर,
भीड में भी तन्हाईया भरपूर,
ऐश ओ आराम बस नाम के हैं,
अब लगता हैं किस काम के हैं,
सपने....
परिवार के भी फिर सजने लगे,
ख्वाहीशो के अंबार लगने लगे,
सब की मांगे भुनाने में,
उम्र गुजर गयी निभाने में,
अब समझा ये नाता तोडते नही,
आखिरी सांस तक पीछा छोडते नही,
कभी ख़ुशी कभी गम कह जाते हैं,
कभी पूरे अधूरे रह जाते हैं,
चलो चैन की नींद अब सो जायें,
काश सब के पूरे हो जायें,
सपने....

15 टिप्‍पणियां:

  1. होश संभाले तो मां बाप ने जगाये,
    बचपन से ही घोट घोट के पिलाये,
    --
    बहुत सही!
    तभी तो समाज में स्थान बन पाता है!
    --
    सुन्दर सन्देश देती नज़्म!

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  2. कभी ख़ुशी कभी गम कह जाते हैं,
    कभी पूरे अधूरे रह जाते हैं,
    चलो चैन की नींद अब सो जायें,
    काश सब के पूरे हो जायें,

    क्या बात है !
    मान गये आपकी पारखी शायरी और निरमा सुपर दोनों को !

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  3. excellent work once again!!!! tumhari toh har nazm dil ko choo jaati hai....aur yeh bhi unme se ek hai....!!!

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  4. WOW! very well description of our mid-class socio-economic condition... keep walking...

    Vins :)

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  5. चलो चैन की नींद अब सो जायें,
    काश सब के पूरे हो जायें,
    सपने....
    बिलकुल आपके सभी सपने पूरे हों। इन्सान के पूरे जीवन की कहानी का सजीव चित्रण। शुभकामनायें।

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  6. spne aese hi hote hen lekin ishvr kre hqiqt ki zindgi men khuda aapke sbhi sat rng bhrde or zindgi khubsurt bhut khubsurt bnade . akhtar khan akela kota rajsthan

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  7. Sapne bina zindgi hi kya...parents ne dekh bhi liye....padh,likh liye...naukri bhi mil gai...ab chokri ki baari honi chahiye :-)

    good one

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  8. चलो चैन की नींद अब सो जायें,
    काश सब के पूरे हो जायें,

    Bahut khoob...

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  9. वाह बहुत बहुत सुन्दर रचना...

    बहुत सुन्दर ढंग से आपने जीवन का सत्य बता दिया..
    सबके सपनों की भीड़ में अपने सपने कहाँ ग़ुम हो जाते हैं,पता भी नहीं चलता..और अंतिम पड़ाव पर पहुंचकर लगता है चलो बाकी सबके सपने पूरे हो जाएँ,इसी से संतोष कर लेना है...

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  10. bahut hi sundar composition hai!!!
    ekdum realistic!!!
    होश संभाले तो मां बाप ने सजाये,
    बचपन से ही घोट घोट के पिलाये,

    उम्र गुजर गयी निभाने में,
    अब समझा ये नाता तोडते नही,
    आखिरी सांस तक पीछा छोडते नही,

    bahut hi acha lika hai!!!!

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  11. खूबसूरत प्रस्तुति. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

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  12. Hello SC,

    Very good work done.
    Sach ko kitni sachhai se likha hai aapne... marvellous :)

    Regards,
    Stranger

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