रविवार, 17 जुलाई 2011

एहसास..........

चन्द रोज पहले उन से मुलाकात ने
कुछ ऐसा निशान दिल पे छोड़ दिया
यूँ लगा बिस्मिल्ला कर इलाही ने
दो अरवाहों(१) को इक दूजे से जोड़ दिया
वो मुझ में और मैं उन में
कुछ इस कदर से गुम थे हो गए
बस आगोशी की खुश्बू इन्तिशार(२) हुई
और शर्म-ओ-हया का चिलमन तोड़ दिया
क़रीबियत का एहसास रश्क-ए-जिनान(३) सा था
यकायक खुद को तेरी बाहों में तोड़ दिया
निकला था घर से खुदा की बन्दगी करने
मोहब्बत के फरिश्तों ने तेरी ग़ली मोड़ दिया
तू दूर है मुझसे फिर भी सांसों में रिहाइश है
तेरी तपिश के सिवा ना खुद को कुछ और दिया
यादों की नीव पे तामीर(४) ख्वाबों का घरौन्दा
आज मिल गया और महलों को मैने छोड़ दिया
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(१) आत्माओं (२) फैलना (३) जन्नत जैसा (४) खडा किया हुआ
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36 टिप्‍पणियां:

  1. यादों की नीव पे तामीर ख्वाबों का घरौन्दा
    आज मिल गया और महलों को मैने छोड़ दिया

    -क्या बात है...बहुत खूब!!!!

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  2. निकला था घर से खुदा की बन्दगी करने

    मोहब्बत के फरिश्तों ने तेरी ग़ली मोड़ दिया

    तू दूर है मुझसे फिर भी सांसों में रिहाइश है

    तेरी तपिश के सिवा ना खुद को कुछ और दिया


    वाह बहुत खूब....प्यार को दिल से महसूस करवा दिया आपने ....

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  3. बेहतरीन रचना कविता दिल तक पहुँचाने के लिए.....! शुभकामनायें

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  4. .... प्रशंसनीय रचना
    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  5. निकला था घर से खुदा की बन्दगी करने
    मोहब्बत के फरिश्तों ने तेरी ग़ली मोड़ दिया

    Ye 'ahsaas' itna khoobsoorat hai ki ise baar baar padhne ka ji kartaa hai. Bahut khoob!!! wah!

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  6. तू दूर है मुझसे फिर भी सांसों में रिहाइश है
    तेरी तपिश के सिवा ना खुद को कुछ और दिया
    यादों की नीव पे तामीर(४) ख्वाबों का घरौन्दा
    आज मिल गया और महलों को मैने छोड़ दिया
    Bahut khoob! Maza aa gaya!

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  7. बेहतरीन रचना कविता दिल तक पहुँचाने के लिए.....! शुभकामनायें

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  8. यादों की नीव पे तामीर ख्वाबों का घरौन्दा
    आज मिल गया और महलों को मैने छोड़ दिया

    Kya baat... bohot unda bhai...

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  9. ब्लॉग को पढने और सराह कर उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया.

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  10. निकला था घर से खुदा की बन्दगी करने

    मोहब्बत के फरिश्तों ने तेरी ग़ली मोड़ दिया!

    आशा करते है मोहब्बत के फरिस्ते आपको ताउम्र खुश रखे!

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  11. यादों की नीव पे तामीर ख्वाबों का घरौन्दा
    आज मिल गया और महलों को मैने छोड़ दिया

    क्या बात है...बहुत खूब
    बेहतरीन रचना के लिए.. शुभकामनायें

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  12. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना! उम्दा प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  13. यूँ लगा बिस्मिल्ला कर इलाही ने
    दो अरवाहों(१) को इक दूजे से जोड़ दिया
    wowest......thnks to publish this beautiful creation

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  14. बहुत खूबसूरत ग़ज़ल लिखी है आपने!
    नियमित लिखते रहें!

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  15. निकला था घर से खुदा की बन्दगी करने
    मोहब्बत के फरिश्तों ने तेरी ग़ली मोड़ दिया

    ....लाज़वाब ! बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

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  16. मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
    ' नीम ' पेड़ एक गुण अनेक..........>>> संजय भास्कर
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com/2011/07/blog-post_19.html

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  17. वाह ! बहुत सुन्दर तरीके से आपने अपनी बात कह डाली.. उम्दा

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  18. भावो को बहुत ही खूबसूरती से प्रस्तुत किया है आपने

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  19. कोमल भावों की मनमोहक अभिव्यक्ति...वाह वाह वाह...

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  20. बहुत खूबसूरत रचना दिल को छु लिया
    अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर

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  21. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
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  22. हमेशा की तरह बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  23. सुन्दर रचना ......खूबसूरत अभिव्यक्ति.....

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  24. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  25. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
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  26. आप इतना अच्छा लिखते हैं...बहुत लोगों को तो यक़ीन नहीं होता कि आप वही सुरेन्द्र हैं जो कि आप 15 साल पहले थे..

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  27. तू दूर है मुझसे फिर भी सांसों में रिहाइश है
    तेरी तपिश के सिवा ना खुद को कुछ और दिया



    खुदा करे दर्दे मुहब्बत न हो किसी को नसीब
    मुझसे ये तकलीफ अब देखी नहीं जाती :)

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  28. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...
    सादर,
    डोरोथी.

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  29. आपको एवं आपके परिवार को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
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  30. वाह साहब ! क्या लिखते हैं आप.. पहली बार आपको पढ़ा.. बहुत आनंद आया.. आभार...

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  31. तू दूर है मुझसे फिर भी सांसों में रिहाइश है
    तेरी तपिश के सिवा ना खुद को कुछ और दिया

    वाह, बेहतरीन पंक्तियाँ !

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  32. लाजवाब ... मज़ा आ गया पढ़ कर ... बेहतरीन ...

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