शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

"मफर सी रिहाइश"

ना जाने क्यों वो मुझ से दूर हैं
इक पल उनके बिना बिताया नहीं जाता
उनकी यादें ही अब साँसों की कासिम(१) हैं
वर्ना रिश्ता-ए-ज़िंदगी निभाया नहीं जाता
उनकी गलियों में मफर(२) सी रिहाइश में हैं
हू-ब-हू उनसा कोई साया नहीं आता
रात होते चाँद में नज़र गड़ सी जाती है
जाने क्यों उनका रुखसार नुमाया(३) नहीं जाता
हार कर क़दम मयखाने मोड़ लेते हैं
वहाँ भी गम-ओ-मय मिलाया नहीं जाता
हर रोज़ उनके लिखे कागज़ के कतरों में
चाह कर भी खुद को गुमाया नहीं जाता
हर लफ्ज़ उनका जीने की उम्मीद सा है
हज़ारों बार पढ़ लूं कुछ मेरा जाया नहीं जाता !!

(१) बांटने वाली (२) खानाबदोश (३) प्रतीत होना

32 टिप्‍पणियां:

  1. हर लफ्ज़ उनका जीने की उम्मीद सा है
    हज़ारों बार पढ़ लूं कुछ मेरा जाया नहीं जाता !!

    Aapki rachnaayein bhi humein aisaa hi mehsoos karaati hain... hazaaron baar padh le kuchh meraa zayaa nahin jaata :-)

    Main aapse is baabat poochhne waala tha ki itne deri kyun hai nayaa likhne me, aapne man ki awaaz sun li :-)

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  2. बहुत ही बढ़िया सुरेन्द्र जी जिस सादगी से आप अपनी बात कहते हैं वो बेजोड़ है...बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  3. ना जाने क्यों वो मुझ से दूर हैं
    इक पल उनके बिना बिताया नहीं जाता

    bahut umda post ..........
    behad prabhavi prstuti & utne hi gehre sabd rachna

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  4. बहुत खूब ...देर से ही सही ...पर अच्छी नज़्म पढने को मिली

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  5. हर लफ्ज़ उनका जीने की उम्मीद सा है
    हज़ारों बार पढ़ लूं कुछ मेरा जाया नहीं जाता !!
    २ रचनाये पढ़ी आप के ब्लॉग पर ,दोनों ही बेहतरीन थी.....बधाई स्वीकारें....

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  6. बहुत बढ़िया ग़ज़ल कह रहें हैं आप .हम देर से आये .और बहुत कुछ सुन भी न सके .

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  7. ख़ूबसूरत शब्दों से सुसज्जित उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई!
    क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनायें !
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  8. मेरा इश्क सूफियाना ! वाह!

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  9. अंदाज़-ए-बयां को क्या कहें
    किसी ने दिल निकालकर कागज़ पर रख दिया....
    बेहतरीन...

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  10. बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने ! आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्यों को नये साल की ढेर सारी शुभकामनायें !

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  11. Sir, I am very thankful to you for visiting my blog.
    aapki nai ghazal padhi maza aaya..khaas kar ye ashhaar dil ko baith se gaye...

    हार कर क़दम मयखाने मोड़ लेते हैं
    वहाँ भी गम-ओ-मय मिलाया नहीं जाता

    हर लफ्ज़ उनका जीने की उम्मीद सा है
    हज़ारों बार पढ़ लूं कुछ मेरा जाया नहीं जाता !!
    HAPPY NEW YEAR...

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  12. इतनी सुन्दर ग़ज़ल के लिए तो
    दाद देने के लिए अल्फाज़ कम पड़ रहे हैं जी!
    --
    प्यार का लब्ज़ जुबां पर कभी लाया नहीं जाता!
    चीर कर अपना ज़िग़र हमसे दिखाया नहीं जाता!!
    --
    10 दिनों तक नेट से दूर रहा इसलिए कहीं भी कमेंट देना सम्भव नहीं हुआ। अब नियमित हो रहा हूँ!

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  13. हू-ब-हू उनसा कोई साया नहीं आता
    sach mein bahut hee sundar rachna hai..har pankti jaise dil ko chu si gayi ho.....wonderful creation dedicated to ur beloved

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  14. टिप्पणी देकर प्रोत्साहित करने के लिए शुक्रिया!

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  15. ना जाने क्यों वो मुझ से दूर हैं
    इक पल उनके बिना बिताया नहीं जाता...
    Bahut Khoob...

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  16. बहुत सुन्दरता से आपने ब्लॉग को सजाया है! बढ़िया लगा! आपके नये पोस्ट का इंतज़ार है!
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है!

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  17. अनुपम भाव संयोजन के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  18. बहुत बेहतरीन....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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