गुरुवार, 6 जून 2013

न जाने क्यों!

क्या अजीब से हालात हैं कि वक़्त नहीं कटता 
निगाहों के सामने से तेरा चेहरा नहीं हटता 
लगता है जैसे ज़माना हुआ तुझे देखे हुए मुझको
यूं बे-वजह ही दिल से गुबार-ए-ग़म नहीं फटता 
हैरान हूँ उन कसमों के मयस्सर होने की नीयत पे 
जो कहती थी तुझे देखे बिना ये दिल नहीं धडकता 
बातें थी शायद बस तेरी बातें ही होंगी वो 
बातों में अब वो पहले सा जुनूँ  नहीं दिखता 
वक़्त है ये वक़्त जो हर शै से है जबर 
इस वक़्त के आगे कोई वादा नहीं टिकता 
काश तू देख पाती चाक-ए-जिगर मेरे 
ना जाने कितने कतरे बहे खूं  नहीं रुकता 
शायद तुझे लगता है ये की बस बहाने हैं 
और मैं तुझे कभी कहीं समझ नहीं सकता 
तू बेखबर है हालत से मेरी जा ओ बेवफा 
सासें हवा सी ले रहा हूँ जी नहीं सकता 
तेरी नज़र में खो चुका हूँ काबिलियत इस क़दर 
बदनसीबी है की अब तुझे हासिल हो नहीं सकता

15 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रचना प्रियवर!
    आप वक्त कटने की बात कहते हो...!
    कविताएँ लिखोगे वक्त मिलोगा ही नहीं।

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  2. सुभान!! कमाल का लिखा है...
    वाह!!

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  3. सुरेन्द्र वीर जी,
    भाभी नाराज़ हैं क्या?
    वैसे वापसी पर: जी आया नुं!

    --
    थर्टीन एक्सप्रेशंस ऑफ़ लव!!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुरेन्द्र वीर जी,
    भाभी नाराज़ हैं क्या?
    वैसे वापसी पर: जी आया नुं!

    --
    थर्टीन एक्सप्रेशंस ऑफ़ लव!!!

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  5. वक़्त है ये वक़्त जो हर शै से है जबर
    इस वक़्त के आगे कोई वादा नहीं टिकता !
    एक दम बिंदास !

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  6. हैरान हूँ उन कसमों के मयस्सर होने की नीयत पे
    जो कहती थी तुझे देखे बिना ये दिल नहीं धडकता bahut khoob .....

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  7. aisa kya ho gaya, kise dekhe hue jamana ho gaya??
    bhabi ji apne ghar gaye hui hain kya??
    ;-)
    Anywz compositions is very good!!!

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  8. बातें थी शायद बस तेरी बातें ही होंगी वो
    बातों में अब वो पहले सा जुनूँ नहीं दिखता ..

    धीरे धीरे हर सैलाब उतर जाता है
    वक्त के साथ न जाने प्यार किधर जाता है ... कभी कही हुई पंक्तियाँ याद आ गयीं अनायास ही ...
    लाजवाब शेर हैं आपकी गज़ल के ...

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  9. बहुत सुन्दर भावों की अभिव्यक्ति . आभार जो बोया वही काट रहे आडवानी आप भी दें अपना मत सूरज पंचोली दंड के भागी .नारी ब्लोगर्स के लिए एक नयी शुरुआत आप भी जुड़ें WOMAN ABOUT MAN

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  10. क्या बात है साहब !! वाह वाह वाह !!

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  11. वाह सुरेन्द्र जी... बहुत दिनों बाद आपको पढ़ने का अवसर मिला...बहुत ही उमदा..

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  12. behad khoobsoorat dard ka bayan...your words holding pain...nice flow.:)

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