शनिवार, 16 जनवरी 2010

फिर मेरी रूह नहीं सिहरेगी !


18 टिप्‍पणियां:

  1. तेरी मासूमियत से थोड़ी शोखी चुरा के,

    सर्द हवा भी तेरे हुस्न को नहीं पहरेगी,


    बहुत बढ़िया!
    गजल में सदभावना के दर्शन परिलक्षित हो रहे हैं।

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  2. बर्गे-गुल(४) तेरे होटों को इक बार छूने दे,

    बाद उसके फिर मेरी रूह नहीं सिहरेगी !
    Kya gazab gazal kahee hai! Waah!

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  3. उर्दू शहद मिलाकर अपने रचना में और मिठास भर दी। अद्भुत।

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  4. तेरी मासूमियत से थोड़ी शोखी चुरा के,

    सर्द हवा भी तेरे हुस्न को नहीं पहरेगी,


    bahut sunder nazm
    padh kar man khush ho gaya

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  5. Another wonderful jewel from your collection of precious stones...this time with an added attraction of a pic...keep writing!

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  6. भाई सुरेन्द्र जी
    बड़ी ही खुबसूरत रचना की आपने
    बहुत बहुत आभार

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  7. I think Its my wish, but written by you, bcz as u remeber i couldn't say anything.
    http://sweetgabru.blogspot.com/2009/10/what-should-i-do.html

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  8. तेरी मासूमियत से थोड़ी शोखी चुरा के,

    सर्द हवा भी तेरे हुस्न को नहीं पहरेगी,
    वाह बहुत सुन्दर रचना है उर्दू के सभी शब्द मेरे लिये नये थी अर्थ दे कर अच्छा किया । बहुत अच्छे जा रहे हो शुभकामनायें

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  9. बहुत बढ़िया कहा आपने ..अच्छा लगा आपका लिखा पढ़ना शुक्रिया

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  10. बहुत सुन्दर रचना लिखा है आपने! हर एक पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगी ! इस लाजवाब और बेहतरीन रचना के लिए बधाई!

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  11. WAAH...LAJAWAAB RACHNA AUR PRASTUTI KA NAAYAAB DHANG....

    BAHUT HI SUNDAR !!!

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  12. Surendra ........shabd -shabd khoobsoorat hai....aur ye prayog bhi achcha laga ...bas ek request hai...Letters seedhey rakhiye...curve na dijiye pls.

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  13. आपको और आपके परिवार को वसंत पंचमी और सरस्वती पूजन की हार्दिक शुभकामनायें!

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