शुक्रवार, 26 जून 2009

अपने बहुत याद आते हैं

कुछ वक्त हुआ है दूर हुए.......पर अपने बहुत याद आते हैं....
कुछ थक के हम यूं चूर हुए.....पर अपने बहुत याद आते हैं....
हैं लोग बहुत आगे पीछे.....पर अपने बहुत याद आते हैं....
कोई यहाँ कोई वहां खीचे....पर अपने बहुत याद आते हैं....
तंदूर की मिटटी की खुशबु....यकलख्त कभी आ जाती है.....
वोह माँ के हाथ की रोटी की....यादों को संजो ले आती है......
माँ जैसे तो है बहुत मिले.....जो लोरी गा के सुनाते हैं......
फिर भी अधूरी ख्वाहिश है....पर अपने बहुत याद आते हैं....
कुछ लम्हे कहूं ख़ुद पे बीते.......हर वक्त मुझे तद्पाते हैं....
कुछ पाकर मैंने सब खोया......तन्हाई में आंसू बहाते हैं......
कुछ दोस्त मिले हैं अपनों से....अपनों की कमी भर जाते हैं....
सोते हैं यादों संग उनकी.....पर अपने बहुत याद आते हैं....

2 टिप्‍पणियां:

  1. यूँ तो अपने अक्सर याद आते है
    पर आप जैसे लोग जब ब्लॉग पर कुछ लिख जाते है
    तब अपने और भी बहुत याद आते है
    मन को कुछ और तड़पा जाते है ॥

    Very nice ;-)

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  2. apno ki kami ko poora dost kiya karte hain....
    chalo aaj se yeh kaam hum he shuru karte hain....
    maana apno jaisa pyaar paana zara mushkil hota hai....
    par kabhi na kabhi woh paate hain jo koshish kiya karte hain....

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