सोमवार, 29 जून 2009

आहट !

कभी अचानक इक आहट के बदले हम नींद उडाये जाते हैं....
वोह जो हो चुके हैं हमसे दूर उन्हें खयालो में लाये जाते हैं......
जो ख़ुद बुझा गए हैं इस दिल से मुहब्बत के चरागों को.....
हम क्यों ठंडी पड़ी राख से शम्मा को जलाए जाते हैं.....
इक वक्त था जब उन्ही से सुबह और उन्ही से रात होती थी.....
अजनबियों से भी गाहे बगाहे उन्ही की बात होती थी.......
अब वक्त ने ही कुछ ऐसे करवट ले ली मुझे जताने को.....
अजनबियों में ही उन्हें पाने की आस लगाए जाते हैं......
चलो घड़ी भी आ गई है इस duniya से rukhsat honay की......
ruhani jannat के intezaar में तेरी मुहब्बत की jannat khone की.....
तू जिस हाल में rahey हमेशा muskuraati rahey......
मर के भी तेरी salamati की खुदा से दुआ किए जाते हैं.....

3 टिप्‍पणियां:

  1. जो ख़ुद बुझा गए हैं इस दिल से मुहब्बत के चरागों को.....
    हम क्यों ठंडी पड़ी राख से शम्मा को जलाए जाते हैं.....

    Wo kehte hai na... "hum kisi ko force nahi kar sakte ki wo humko pyar karey... aur one-sided love mein shayad kuch logo ko masters degree haasil hai :)"

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  2. is baar kis line par comment karu samajh hi nahi aata...ek ek line jaise dil se likhi gayi hai..

    bahut hi vadhiya hai ji..
    bas itna hi kahungi

    Khush rehe wo hamesha..
    aapke sath sath hum bhi yahi dua kiye jaate haii...

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  3. uske khusi ke dua hum kyu karte hai ...
    ...kasssh he koi samjah pata ...

    uske ek hasi per hum marte hai ..kash koi samjh pata....

    kitna asan hai ye kahna ke vo ho gye kise ke...

    eska matlab humare liye kya hai ..kash ke koi samjh pata !!!!

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