शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010

"कशिश"

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9 टिप्‍पणियां:

  1. wah.....
    surendrar ji
    rachna me kashish hai
    bhai man jaye ......ap ko
    badhaiyan.................

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  2. रचना नाम से ही कशिश नही है वाकई इसमे कशिश है। लाजवाब मुझे आपकी उर्दु से बहुत से शब्द सीखने को मिलते हैं धन्यवाद्

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  3. इस उम्दा गजल के लिए
    मुबारकवाद कुबूल करें!

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  4. Hello,

    Bahut achha likha hai... The entire description and the pic -- dono ka taal-mail achha lakh raha hai...

    Beautiful :)
    Regards,
    Dimps

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  5. वाह इतना सुन्दर ग़ज़ल लिखा है आपने की मैं निशब्द हो गयी! लाजवाब!

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  6. Ham thoda der aaye par durust aaye......Husn ke mulazim banane ki ye iltiza acchi lagi...Lekin thoda sambhal ke :-)

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