गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010

क्या पुकार पायेंगे तुझे!


कृप्या तस्वीर पर क्लिक करें!

13 टिप्‍पणियां:

  1. तू नहीं, खुशबू नहीं, तेरे आने की आरज़ू नहीं,
    क्या सूखे दरख्तों पे पत्ते आयेंगे कभी,

    उम्मीद पर दुनिया कायम है जी!
    बसन्त में तो सभी गदरा जाते हैं!
    इस पोस्ट की चरचा यँहा है-
    http://anand.pankajit.com/2010/02/blog-post_11.html

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  2. Hello ji,

    क्या जनाज़ा-ए-राह तुझे पुकार पायेंगे कभी!

    Kya likha hai!! Fantastic :) yeh climax wali line... katal-e-aam!! Khush ho gayaa mann ji... Nice work done.

    Regards,
    Dimple
    http://poemshub.blogspot.com

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  3. तू नहीं, खुशबू नहीं, तेरे आने की आरज़ू नहीं,
    क्या सूखे दरख्तों पे पत्ते आयेंगे कभी,
    लम्हे गुज़रते हैं बस अब गिरयाही(१) में,
    क्या इस बसंत में फूल लहलहाएंगे कभी,
    Ye to chand dinon ki patjhad hai...dua karti hun, gulshan lahlahayenge!

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  4. क्या जनाज़ा-ए-राह तुझे पुकार पायेंगे कभी!.......Agar kahoon ke dard likha hai......To dard to khoobsoorat nahi hota.... Han rachna mein dard dekhane mein aap kamyaab hue hai ....but itni negativity kyon ?

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  5. रब्त- ए - ख्याल ka matalab intimate thought or personal thought hi hota hai kya ? AM I right....pls guide mein

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  6. Questions very well put...actually the mind's ponderings. But some questions stay unanswered in life (even Google cannot answer them!). We ourselves have to search for those...if lucky we get the answers ...for others God changes the question paper the moment they believe that they have found out the answers.

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  7. तू नहीं, खुशबू नहीं, तेरे आने की आरज़ू नहीं,---- वाह लाजवाब हृदयस्पर्शी नज़म शुभकामनायें

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  8. दर्द ही दर्द..और उसपे अपने जो चित्र इस रचना के साथ लगाया क्या कहू में अब भला...दर्द को कहू बहुत अच नहीं होअग मुझसे..

    बस दुआ है ये जो दर्द भरा है लफ्जो में जिंदगी से सदा दूर रहे

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  9. महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें!
    बहुत बढ़िया लगा ! बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने ! बधाई!

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  10. सुरेंदर भाई
    लाजबाब रचना
    बधाई स्वीकारें

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