बुधवार, 19 अगस्त 2009

कितना आसान होता है न!

जन्मों जन्म के वादे बना के,
ख्वाबों की मीठी बातें सुना के,
कितना आसान होता है न रिश्तों को यूं तोड़ देना,
ज़िन्दगी के हर क़दम साथ निभा के,
लडखडाते क़दमो से बाहों में उठा के,
कितना आसान होता है न राहों को यूं मोड़ देना,
गुमनामियों की गर्त में रौशनी दिखा के,
फिर कलाई पे अपनी नाम मेरा लिखा के,
कितना आसान होता है न बीच राह यूं छोड़ देना,
ज़माने से छुप छुप संग मेरे घूम के,
लरज़ते लबों से मेरे लबों को चूम के,
कितना आसान होता है न किसी और से नाता जोड़ लेना,
आखिरी वक्त तुझे देखने की आरजूएं सजा के,
फिर हमेशा की तरह तुझे न करीब पा के,
कितना आसान होता है न साँसों की ज़ंजीर यूं तोड़ देना!

12 टिप्‍पणियां:

  1. जन्मों जन्म के वादे बना के,
    ख्वाबों की मीठी बातें सुना के,
    कितना आसान होता है न रिश्तों को यूं तोड़ देना,
    सुन्दर अभिव्यक्ति है मगर आप्से किस ने कहा कि आसान होता है अगर आसान होता तो आप ये कविता कैसे लिखते? जो आसान लगता है वो शायद एक अन्देखा सच है अछ्हे रचना के लिये बधाई

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  2. आखिरी वक्त तुझे देखने की आरजूएं सजा के,
    फिर हमेशा की तरह तुझे न करीब पा के,
    कितना आसान होता है न साँसों की ज़ंजीर यूं तोड़ देना!
    Acha likha hai sir..

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  3. गुमनामियों की गर्त में रौशनी दिखा के,
    फिर कलाई पे अपनी नाम मेरा लिखा के,
    कितना आसान होता है न बीच राह यूं छोड़ देना,

    बहुत सुन्दर !

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  4. Haan....ham yahee sochte rah jate hain..gar aisa hota to..gar aisa na hua hota to..!
    aapne jistarah, pesh kiya hai, lagta hai, aapke liye ye behad asaan ho..!

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  5. जन्मों जन्म के वादे बना के,
    ख्वाबों की मीठी बातें सुना के,
    कितना आसान होता है न रिश्तों को यूं तोड़ देना,
    kita aasan hai.....aap sirf kah rahein hain aasan aapke liye bhi nahi hai aur na unke liye jo aisa kar gaye hain...
    lekin aapko laga ki bahut aasan hai koi unse bhi to pooche?
    sundar rachna dil se nikli hai...

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  6. SURENDAR JI वाकई मे बहुत ही वाजिब सवाल है ........पर इतना आसान नही होता है ........आपके इस कोमल भाव को सादर नमन है!

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  7. आपकी इस कोमल भाव को मेरा सादर नमन है .....आसान नही होता है .....बेहतरीन

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  8. बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण रचना! पढकर बहुत अच्छा लगा!
    मेरे नए ब्लॉग पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com

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  9. Apne hisse ki jindgi to ham jee chuk,ab to bas dhadkano ka lihaaj karte ha....
    Kya kahe in duniya walon ko jo aakri saans par bhi aitraj karte ha.......
    Chawla ji tussi to cha gaye....v.gud :)

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  10. बहुत गहरी रचना । आसान तोटने वालों के लिये होता होगा, जो दिल लगाते हैं वे तो लहूलुहान हुए रहते हैं .

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  11. जन्मों जन्म के वादे बना के,
    ख्वाबों की मीठी बातें सुना के,
    कितना आसान होता है न रिश्तों को यूं तोड़ देना,

    जी आपने सही फरमाया।
    दुनिया बहुत बेरहम हो गई है।

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