रविवार, 23 अगस्त 2009

यह सब क्या हैं तेरे आगे!

ये चाँद सितारे और फूल खिलखिलाते,
ये सब क्या हैं तेरे आगे,
गुलाब की पंखुडियां और भवरे मंडराते,
ये सब क्या हैं तेरे आगे,
सूरज की मीठी तपिश में पक्षी चेहचाहाते,
ये सब क्या हैं तेरे आगे,
पहाडों से छम छम ये झरने लहलहाते,
यह सब क्या हैं तेरे आगे,
मयकश साकी की शान में बंदिशें सुनाते,
यह सब क्या हैं तेरे आगे,
पीर खुदा के सजदे में कलमे जो गाते,
यह सब क्या हैं तेरे आगे,
जन्नत-ऐ-हूर भी तेरे हुस्न के चर्चे गाते,
यह सब क्या हैं तेरे आगे!

9 टिप्‍पणियां:

  1. वाह वाह क्या बात है आज तो पूरे रंग मे हो बेटा बधाई बहुत सुन्दर कविता है

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  2. सब कुछ तो आपने खुद ही बता दिया क्या है जनाब ......अच्छी शुरुआत .....!!

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  3. बहुत अच्छा लगा! रचना की एक एक लाइन में बहुत गहराई है और दिल से लिखा है आपने हर एक शब्द! बहुत खूब!
    श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनायें!

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  4. जन्नत-ऐ-हूर भी तेरे हुस्न के चर्चे गाते,
    यह सब क्या हैं तेरे आगे!

    वाह..!
    क्या समर्पण है?
    मुबारकवाद कुबूल करें।

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