मंगलवार, 21 जुलाई 2009

तेरा इंतज़ार !

क्या आज भी दिन मेरे लिए वैसे ही हैं

ये खिलखिलाते हुए फूल तेरे जैसे ही हैं

तू शायद दूर जा के भूल गई हो मुझको

हम तेरे इंतज़ार में काफिर वैसे ही हैं

तेरी आहटों का तसव्वुर ख्याल-ऐ-दिल में हैं

तेरे एहसासों की एहमियत पहले जैसे ही हैं

हर शै में तुझे पल पल मैं तलाशता हूँ

तुझे ढूँढ लेने की जुनूनियत वैसे ही हैं

अब और न तड़पा पहलु में आ भी जा दिलबर

मरते दम तक तेरी चाहत पहले जैसे ही है.

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